मेरी पिया

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दरवाजे की घंटी सुन कर कमला ने भाग कर दरवाजा खोला और सुनीता बड़बड़ाती हुई अंदर घुसी ,”स्कूल ने टीचर बना दिया तो दिमाग ही खराब हो गया है, कुछ भी बकवास कर सकती है। मेरी पिया को पागल कहती है , इसे तो मैं नौकरी से निकलवा कर रहूँगी ऊपर तक शिकायत करूँगी मुझे इस स्कूल में पिया का दाखिला करवाना ही नहीं चाहिए था, ये नए नए स्कूल इन्हें क्या मालूम बच्चों और पढ़ाई के बारे में मैं अपनी पिया को शहर के सबसे बड़े स्कूल में भेजूंगी

अम्मा पानी का ग्लास हाथ में लेकर कमरे से निकल कर आईं और ग्लास डाइनिंग टेबल पर रख कर वहीं बैठ गईं इस बीच वो लगातार सुनीता को देख और उसकी बातें सुन रहीं थीं जब उन्होंने देखा कि सुनीता थोड़ा शांत हो गई तब उन्होंने बोलना शुरू किया, ” अगर भड़ास निकल गई हो तो हमें भी बता दो ये इतना गुणगान किसका करे जा रही हो ?” अम्मा की आवाज से सुनीता जैसे जाग गई, “ अरे कुछ नहीं अम्मा वो पिया के स्कूल गई थी, उसको स्कूल जाते हुए एक महीना हो गया है तो उसकी टीचर ने बात करने के लिए बुलाया था
तो क्या हुआ? इतना बिगड़ किस पर रही थी ?” अम्मा ने पूछा
उसी मुई टीचर पर गुस्सा रहा है कहती है कि पिछले एक महीने में पिया की बातचीत और हाव भाव से उसे लगता है कि पिया सामान्य बच्ची नहीं है हमें उसे किसी मनोचिकित्सक को दिखाना चाहिए और मंदबुद्धी वाले बच्चों के स्कूल में डालना चाहिए बताइए क्या मेरी पिया पागल है जो मैं उसे मनोचिकित्सक को दिखाऊं ? खुद उससे बच्चों को पढ़ाया नहीं जा रहा तो कह रही है मंदबुद्धी स्कूल में डालो
अम्मा को देख कर लग रहा था कि बहुत गहरी सोच में हैं उनको गौर से देखते हुए सुनीता बोली, “देखा आपको भी बुरा लगा और गुस्सा भी आया, बस ऐसे ही मुझे भी। मन तो कर रहा था मुँह नोच लूं उसका
अम्मा ने गंभीरता के साथ जवाब दिया, “मुझे गुस्सा नहीं रहा बल्कि चिंता हो रही है उसकी हमारी पिया से कोई दुश्मनी तो है नहीं फिर भी अगर उसने इतनी बड़ी बात कही है तो कुछ वजह जरूर होगी कभी कभी पिया घर में भी बहुत चिड़चिड़ी हो जाती है और कभी बिलकुल चुप हो जाती है हो सकता है वो टीचर सही कह रही हो , हमें एक बार मनोचिकित्सक को दिखा ही लेना चाहिए कम से कम जो शक है वो मिट जाएगा
सुनीता चिढ़ कर बोली ,” क्या अम्मा आप तो उस टीचर की तरफदारी कर रही हैं आपके कहने के हिसाब से केवल उसकी बात सुनकर हम अपने बच्चे पर शक करना शुरू कर दें हो सकता है वो ही पढ़ा पा रही हो और अपनी कमी छुपाने के लिए कहानी गढ़ रही हो

बिलकुल हो सकता है और अगर ऐसा है तो हम लिखित शिकायत देंगे स्कूल प्रबंधन को लेकिन जरा सोचो अगर उसकी बात सही हुई और हमने अपनी बच्ची की सही देखरेख नहीं की तो हो सकता है जो बिमारी अभी शुरूआती हालत में है आगे जाकर उसकी जिंदगी खराब कर दे
सुनीता सोच में पड़ गई शाम को रोहित के आफिस से लौटते ही अम्मा ने दोनों को बैठा कर बात छेड़ी एक बार को रोहित को भी धक्का सा लगा लेकिन जल्दी ही उसे अम्मा की बात समझ में गई
पिया को लेकर दोनों अगले ही दिन मनोचिकित्सक के पास गये मनोचिकित्सक ने पिया का परिक्षण करके बताया कि उसका विकास सामान्य बच्चों जैसे नहीं हो रहा है इसलिए उसे विशेष देखभाल की आवश्यकता होगी साथ ही उसे अलग तरह के टीचर की भी आवश्यकता हो सकती है सुनीता ने आंसू भरी आंखों से रोहित को देखा तो रोहित ने उसे हिम्मत रखने का इशारा किया दोनों मनोचिकित्सक को धन्यवाद करके घर गये
घर पहुँच कर पहले सुनीता फूट फूट कर रोई फिर फफक फफक कर सारी बात अम्मा को बताई। पिया सहमी हुई कोने में खड़ी थी
अम्मा ने जल्दी से उसे सीने से लगा लिया फिर दोनों की ओर मुखातिब होकर कहा ,” कुछ नहीं हुआ हमारी बच्ची को ,बस हमें उसकी थोड़ी देखभाल ज्यादा करनी है लेकिन उसे ये एहसास नहीं कराना कि वो बाकी बच्चों से अलग है इस बारे में इसके स्कूल में भी बात करके देखो
सुनीता ने स्कूल टीचर से बात करी तो उसने पूरी मदद का आश्वासन दिया और पिया को बाकी बच्चों के बाद अलग से समय देने की बात भी की। टीचर की ओर से इतना सब सुनकर सुनीता भावुक हो गई, “मैं आपको नाहक ही गलत समझ रही थी असल में तो आपने पिया के बारे में बता कर हमारी मदद की है हम आपका एहसान कभी नहीं भूल पाएँगे
नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं है मैं तो बस एक टीचर का फर्ज निभा रही थी।टीचर सुनीता का हाथ अपने हाथ में लेकर बोली
कुछ समय में सुनीता ने महसूस किया कि पिया भले सामान्य बच्चों के बराबर सही मगर उसके अंदर सुधार दिख रहा था।
इसके लिए सुनीता और रोहित पिया की टीचर को ही जिम्मेदार मानते रहे।
– By Nitin Srivastava

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