मुझसे कल किसी ने पूछा

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मुझसे कल किसी ने पूछाकैसा लगता है तुम्हे अपने बारे मे  अस वीमेन ” (as a women)? मैं धीरे से हँसी और मुस्कुरुकार जवाब दिएयूनिवर्स और यूनिवर्सलमुझे लगता है की मैं यूनिवर्स हूँ.और मुझी मे ये सारा अंतरिक्ष समाया हुआ हैमुझसे से होकर ये नक्षत्र गुज़रते हैं. मैं सूरज की तरह अपने घर को सवेरे सवेरे रोशन करती हु.मेरा घर मेरे द्वारा निकली हुई ऊर्जा और किरणों से  जगमगाता है.ये आकाश गंगा मुझसे होकर के ही गुज़रती है.मैं ही वो  छोटी छोटी खुशियों की तारो नुमा बारात हुजो चाँद की डोली लेकर हर रात का अंत करती है..और नए दिन की लाजवाब शुरुआत्त..चुन चुन कर एक एक सितारा इकठ्ठा करती हु और यही ज़मीन पर अपना आसमान सजाती हु.यहि तो घर है मेरा जिसे मैं बसेरा बनाती  हु.मैं ही हु जिससे जीवन पनपता है और मैं ही वो अवनि हु जिससे गौरव छलकता है..

– By Avni Mishra

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